होम
  पेजरेडियो
  वाटिकन
रेडियो
  वाटिकन  

वर्ग


  उदारता और    एकात्मकता


  कलीसिया


  संस्कृति और समाज;


  वाटिकन के दस्तावेज़


  धर्मसभा


  अन्तर कलीसियाई    एकतावाद


  परिवार


  युवा


  न्याय और शांति


  राजनीति


  धर्म और संवाद


  विज्ञान और नीतिशास्त्र


  आमदर्शन और देवदूत    प्रार्थना


  प्रेरितिक यात्राएँ


cx_t14


 होम पेज > धर्म और संवाद > समाचार


02/11/2009 12.47.24



20 जेस्विट प्रोविंशियलों ने श्री रामकृष्ण परमहंस मंदिर के दर्शन किये





Justin Tirkey

कोलकाता, 2 नवम्बर, 2009। दक्षिण एशिया के 20 जेस्विट प्रोविंशियलों और रिजनल सुपीरियरों ने 29 अक्तूबर शु्क्रवार को हिंदु धार्मिक गुरुओं से मुलाकात की और बेलूर के कोनचौकी में अवस्थित हिंदु तीर्थस्थल के दर्शन किये।
उन्होंने बताया कि यह एक आध्यात्मिक अनुभव था।
कोलकाता में दक्षिण एशिया के 20 जेस्विट सुपीरयरों और प्रोविंशयलों की द्वैवार्षिक सभा का आयोजन किया गया था।
यह एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन है जिसमें भारत के अलावा नेपाल, बांगला देश और श्री लंका के प्रतिनिधि हिस्सा लेते हैं।
इस दर्शन की जानकारी देते हुए कोलकाता के जेस्विट प्रोविंशयल जोर्ज पतेरी ने बताया कि बेलुर का मंदिर गंगा नदी के किनारे अवस्थित है जिसे श्री रामकृष्ण परमहंस को समर्पित किया गया है।
इसका निर्माण श्री रामकृष्ण परमहंस के शिष्य स्वामी विवेकानन्द ने सन् 1886 ईस्वी में इसका निर्माण कराया था।
दर्शन के आयोजक फादर पतेरी ने बताया कि मंदिर के दर्शन के द्वारा वे चाहते है कि हिन्दु-ईसाई वार्ता को बढ़ावा मिले।
संत जेवियर स्कूल कोलकाता के एक हिंदु शिक्षक दीपांकर वसु ने जेस्विट पुरोहितों के लिये गाइड की ज़िम्मेदारी निभायी।
उन्होंने बताया कि जेस्विट पुरोहितों का मंदिर में प्रार्थना करने जाने से लोगों के बीच यह संदेश जायेगा कि हमें दूसरों के धर्मों का उचित आदर करना चाहिये।
मंदिर के पुजारी स्वामी शानतनु महाराज ने बताया कि स्वामी विवेकानन्द ने अपने नये धर्मसमाज की नींव ख्रीस्तमस की रात में डाली और वे रात-भर येसु के जीवन पर मनन-चिंतन करते रहे।
यह भी बताया जाता है कि श्री रामकृष्ण को येसु के दर्शन हुए थे और उसके तीन दिन तक वह येसु के बारे में चिन्तन करते रहे।
मंदिर के दर्शन के पहले जेस्विट प्रोविंशियलों ने धन्य मदर तेरेसा द्वारा संस्थापित धर्मसमाज मिशनरिस ऑफ चारिटी की मदर जेनरल सिस्टर मेरी प्रेमा से भी मुलाक़ात की।


  « सूची पर वापस

 




13/11/2009 15.34.18
संयुक्त राष्ट्र संघ का दायित्व सब लोगों के लिए धार्मिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करना है





12/11/2009 15.25.52
सर्व धर्म मैत्री संघ द्वारा धर्माध्यक्ष देव प्रसाद गनावा का अभिनन्दन



30/10/2009 15.14.03
पाकिस्तान में धर्माघ्यक्षों द्वारा ईशनिन्दा कानून को वापस लेने का आग्रह



28/10/2009 12.33.37
न्यूयॉर्कः वाटिकन ने धार्मिक असहिष्णुता के कारणों से अवगत कराया


24/10/2009 20.26.59
मुसलमानों के साथ वार्त्ता और धार्मिक स्वतंत्रता के बारे में विचार-विमर्श




संबंधित वर्ग


पिछला
  पृष्ठ  पिछला पृष्ठ
होम
  पेज  होम पेज
सम्पादकीय
  मंडल के साथ
  पत्राचार  सम्पादकीय मंडल के साथ पत्राचार
top
top
All the contents on this site are copyrighted ©. Webmaster / Credits / Legal conditions
top
top